Thu. Apr 11th, 2024

    आओ जानते है कि Banking में  NEFT , RTGS, IMPS. UPI, IFSC Code, MICR Code, SWIFT Code क्या होते है आज के समय में बैंक भी डिजिटल हो गए है पहले के समय में इतनी सुविधा नहीं थी जितनी कि आज के समय में है आज कल बैंक गाँव के आस पास पहुच गया है पहले के समय में लोग अपने पैसे निकलने अपनी पासबुक लेकर बैंक जाते थे और लाइन में लगते थे फिर पैसे निकलते थे बैंक कर्मचारी दवारा पैसे दिये जाते थे कि आपके अकाउंट में कितने पैसे है और फिर आपके sign को मैच किया जाता था तब जाकर बैंक कर्मचारी आपको आपके खाते में से पैसे देता था पहले बैंक के अंदर के system भी हस्त लिखित होते थे जिसमें एक रजिस्टर बनाया जाता था और एक folio नंबर दिया जाता था फिर सारे पैसे जमा कि प्रिकिया को वो register में नोट करता था फिर जा कर बैंक कर्मचारी आपके कैश को जमा कर देता था पहले बैंक पूरे तरीके से ऑनलाइन नहीं थे फिर उस के बाद ATM को धीरे धीरे लगाया गया फिर लोग एटीएम से पैसे निकलने लगे

    पहले के समय में लोग Money order का भी प्रयोग एक जगह से दूसरी जगह पैसे पहुचाने के लिए करते थे कुछ लोग उस समय money order को जल्दी पहुचाने के लिए दलाली भी लेते थे उसमें भी दलाली का एक स्लैब बना हुआ होता था और उस अनुसार वो पैसे भेजने कि दलाली लेते थे जाने और आने का खर्चा  अलग लगता था

    डिजिटल बैंकिंग के आने से ये सब बहुत कम हो गया है नई नई बैंकिग application से समय और दलाली दोनों का ही बचाऊ हुआ है अब जिस समय चाहो आप पैसे भेज सकते हो 

    उसके बाद net Banking का प्रयोग होने लगा जिसे आप ऑनलाइन पैसे transfer करने लग गए जो कि बहुत ही अच्छी सुविधा थी घर बैठे कुछ हद तक काम होने लगे उसके बाद मोबाइल पर सभी banks ने application बनानी शुरू कि और फिर application को मार्किट में launch किया फिर और सुविधा हो गई. पर आज भी मोबाइल में net Banking में NEFT RTGS IMPS और UPI का प्रयोग होता है आओ जानते है कि NEFT RTGS IMPS और UPI क्या होता है और क्या इनके कार्य है .

    NEFT (Banking)

    NEFT का पूरा नाम national electronic funds transfer है NEFT के दवारा हम एक अकाउंट से दुसरे अकाउंट में पैसे transfer करते है NEFT शुरुवात नवम्बर 2005 में हुई थी इसे इंडिया का सेंट्रल बैंक भारतीय रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया maintain करता है  NEFT कभी भी रियल टाइम में transfer नहीं होते है क्यूँ कि इनके बैच बनते है और 2 से 4 घंटे में  पैसे ट्रान्सफर होते है सभी लेन-देन का एक ग्रुप बनाया जाता है फिर वो सारे लेन-देन एक साथ जाते है NEFT का जो पहले समय होता था वो 8 बजे से शाम 7 बजे तक होता था  अगर आप शाम को 7 बजे के बाद पैसे transfer करते थे तो वो अगले दिन सुबह के पहले बैच में transfer होते है भारतीय रिजर्व बैंक दवारा दिसम्बर 2019  गाइडलाइन्स आये कि  NEFT 24*7 काम करेगा. NEFT करने के लिए पहले आपको कुछ डिटेल्स ऐड करनी होती है

    Banking  NEFT , RTGS, IMPS. UPI, IFSC Code, MICR Code
    1. सब से पहले आपको netbanking लेनी पड़ती है और उसमें transaction rights लेने पड़ेगे
    2. फिर आपको उसमें लाभार्थी का नाम(Beneficiary Name) ऐड करना पड़ेगा
    3. उसके बाद उसका अकाउंट नंबर ऐड करना होता है और उसका IFSC Code चाहिए

    इन सब डिटेल्स को डाल कर हम अकाउंट को ऐड करते है फिर आपके register मोबाइल पर OTP Code  आता  है फिर हमारे उस code को डालना पड़ता है बैंक को ये बताने के लिए कि इस अकाउंट को हमने ही ऐड किया है इस लिए OTP Code डालना पड़ता है .बैंक अकाउंट के ऐड होने के बाद Fund Transfer करने के लिए हमें कुछ समय प्रतीक्षा करनी होती है इस को हम Cooling Period कहते है इस Cooling Period में customer को SMS भेजे जाते है कि कहीं ये किसी fraud आदमी ने तो नहीं अकाउंट ऐड किया उस SMS में लिख दिया जाता है अगर अपने ऐड नहीं किया है तो बैंक से संपर्क करे अगर वो आपने नहीं किया है तो आप बैंक को बता कर उसे डिलीट करवा सकते है

    RTGS (Banking)

    RTGS का पूरा नाम Real Time Gross Settlement है RTGS कि शुरुवात march 2004 में हुई थी इसे इंडिया का सेंट्रल बैंक भारतीय रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया maintain करता है RTGS में जब भी आप पैसे को ट्रान्सफर करते है तो वो पैसे उसी समय पर जो खाता आपने ऐड किया है उसके खाते में चले जाते है RTGS में किसी ग्रुप या बैच कि जरुरत नही पड़ती है इस में one to one Settlement होता है RTGS में आप कम से कम 2 लाख से लेन देन शुरू होता है इस से कम आप पैसे को transfer नहीं कर सकते है RTGS का जो समय होता है वो वर्किंग Hours होता है उसके बाद आप कोई भी लेन देन नहीं कर सकते है जिस दिन छुट्टी होती है आप उस दिन भी RTGS नहीं कर सकते है

    IMPS (Banking)

    IMPS का पूरा नाम Immediate Payment Service है NEFT और RTGS के कारण ही IMPS को लाना पड़ा था NEFT और RTGS Working Hours के बाद काम नहीं करते थे न ही छुट्टी वाले दिन काम करते थे उस मुसीबत का समाधान करने के लिए IMPS को  2010  में NPCI दवारा बनाया गया था इसका जो फण्ड का लेन देन NPCI नियंत्रण करता है यह सब भारतीय रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया कि देख रेख में होता है IMPS के दवारा हम पैसे को कभी भी ट्रान्सफर कर सकते है जब भी आप पैसे IMPS के दवारा भेजते है तो पैसे उसी समय दुसरे खाता धारक के अकाउंट में पहुच जाते है IMPS में पैसे transfer करने के लिए हमें Mobile No और MMID कि जरूरत होती है MMID 7 डिजिट का id होता है जो कि बैंक issue करता है वो अकाउंट नंबर से unique ऐड होता है आप adharcard के दवारा IMPS का लेन देन कर सकते है आधारकार्ड से पैसे transfer करने के लिए आपका आधारकार्ड बैंक अकाउंट के साथ लिंक होना बहुत जरुरी है

    UPI (Banking)

    UPI का पूरा नाम Unified Payment Interface  है इसे भी NPCI ने ही बनाया है यह सब भारतीय रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया कि देख रेख में होता है यह 11 अप्रैल 2016 को launch हुआ था इसकि जो बनावट है वो IMPS कि तरह ही है इस में भी आप पैसे उसी समय पर transfer कर सकते है इस में आप 24 घंटे में कभी भी पैसे transfer कर सकते है UPI के APP के अंदर आपको सभी बैंकों को ऐड का feature मिल जाता है पहले आप जब पैसे transfer करते थे तो Same बैंक कि application download करते थे पर UPI कि एक application में सभी बैंक का आप्शन है UPI में आपका मोबाइल नंबर बैंक अकाउंट से link होना चाहिए उसे आप किसी के अकाउंट में पैसे  डाल भी सकते है और मंगवा भी सकते है वो पैसे सीधा आपके अकाउंट में जायेगा इसमें हमें IFSC code कि जरुरत नहीं पड़ती है इसमें VPA कि जरुरत पड़ती है इसे Virtual Payment Address कहा जाता है इसके लिए आपके mobile में register नंबर रहना चाहिए जो आपके बैंक अकाउंट से लिंक है ताकि बैंक वाले आपको SMS भेज कर आपको प्रमाणित कर सके

    UPI कि सबसे अच्छी बात यह है आप पेमेंट कि रिक्वेस्ट भेज कर जिसे आप पैसे मंगवाना चाहते है उसे मंगवा सकते है जब आप उसको रिक्वेस्ट भेजेंगे और वो accept कर लेता है तो आपके अकाउंट में पैसे आ जाते है UPI में आप कितने भी VPA(Virtual Payment Address) बना सकते है अगर आपके पास अलग अलग बैंक में अकाउंट है तो आप सारे अकाउंट का VPA बना सकते है वो आप एक ही application में चला सकते है बस इसमे शर्त है कि सभी अकाउंट में एक ही नंबर register होना चाहिए इस में लेन देन सुरक्षित है

    UPI का प्रयोग आप कई तरीकों से कर सकते है

    1. VPA (Virtual Payment Address )दवारा कर सकते है
    2. मोबाइल नंबर के दवारा भी कर सकते है
    3. आप आधारकार्ड के दवारा भी कर सकते है
    4. IFSC कोड के माध्यम से भी कर सकते है
    5. OR Code के दवारा भी किया जा सकता है

    IFSC,SWIFT और MICR CODE क्या होता है ?

    IFSC CODE (Banking)

    IFSC CODE का पूरा नाम indian financialsystem code होता है IFSC code हर बैंक शाखा का अलग होता है अगर आप NEFT, RTGS, IMPS करना चाहते है तो आपको IFSC code कि जरुरत पड़ती है बैंक को ये code भारतीय रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया दवारा दिया जाता है उदहारण के तौर पर समझते है कि अगर आपने Yes Bank से अगर SBI मुख्य शाखा चंडीगढ़ में पैसा भेजना है तो आपको SBI मुख्य शाखा चंडीगढ़ का IFSC code चाहिए होगा जो कि SBIN0000628 है IFSC Code में पहले चार डिजिट (SBIN) ये बैंक का code होता है उसके बाद जो(0) होता है वो control नंबर होता है जो कि आने वाले समय में RBI के अनुसार बदल भी सकता है और आखिरी के 6 डिजिट(000628) बैंक कि शाखा का code होता है

    MICR CODE (Banking)

    MICR CODE का पूरा नाम magnetic ink character recognition है इस का प्रयोग cheque को transfer के लिए किया जाता है जब आप अपने बैंक में चेक क्लीयरिंग के लिए देते है तो वो एक खास machine दवारा उस चेक को scan करता है वो machine चेक का MICR CODE read करता है यह एक तरह से बारकोड कि तरह करता है यह एक 9 डिजिट का Code होता है जो कि आपके cheque के नीचे लिखा होता है ये code भी हर बैंक शाखा का अलग होता है जैसे कि  SBI मुख्य शाखा चंडीगढ़ का MICR CODE 160002020 है इस में से पहले तीन डिजिट आपके city code (160) होता है उसके बाद जो तीन डिजिट (002) ये आपका बैंक code होता है और आखिर के तीन डिजिट (020) जो होता है ये आपकि शाखा का code होता है चैक के निचे पहले चैक नंबर होता है उसे बाद MICR code लिखा होता है

    MICR Code और IFSC code आपको cheque के ऊपर ही मिल जाते है क्यूँ कि हर किसी चैक पर MICR Code और IFSC code दोनों ही प्रिन्टेड होते है इस लिए ये आसानी से देखने को मिल जाते है इसके लिए आपको बैंक में जाकर पूछना नहीं पड़ता है .

    Banking  NEFT , RTGS, IMPS. UPI,

    SWIFT CODE (Banking)

    IFSC code से आप इंडिया के अंदर बैंकों में IFSC code के दवारा पैसे भेज सकते है बिलकुल वैसे ही विदेशो  के बैंक में अगर अपने पैसे भेजने है तो SWIFT CODE कि जरुरत पड़ती है ये एक अनोखा code होता है जब भी हम विदेशो  के बैंकों से पैसे मंगवाते है यह भेजते है तो इसकी जरुरत होती है SWIFT CODE का पूरा नाम society for worldwide inter bank financial telecommunication होता है SWIFT CODE हर शाखा में नहीं होता है इस लेन देन को मंजूर ISC (international organization for standardization) करता है यह code 11 डिजिट का होता है उदहारण के तोर पर चंडीगढ़ कि NRI शाखा का SWIFT CODE SBININBB283 ये है इसमे से जो पहली चार डिजिट (SBIN ) बैंक का code होती है उसे अगली दो डिजिट (IN) country code होता है अगली दो डिजिट (BB) Location code होता है आखिरी तीन डिजिट (283) ब्रांच का code होता है अगर आपका अकाउंट जिस शाखा में है अगर उसमें SWIFT CODE नहीं है तो आपको नया अकाउंट खुलवाने कि कोई जरुरत नहीं होती है आप अपने नजदीक कि ब्रांच का SWIFT CODE दे सकते है अकाउंट नंबर से ट्रैक करके आपके अकाउंट में पैसा आ जाता है क्यूँ कि बैंक अकाउंट नंबर भी सबके अनोखे होते है इस लिए किसी गलत अकाउंट में पैसा नहीं जाता है और आप SWIFT CODE के जरिये विदेशी बैंकों से भी आप अपना लेन देन कर सकते है.   

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