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    Kausani |Switzerland of Uttarakhand |कौसानी उत्तराखंड का स्विज़रलेंड

    Kausani उत्तराखण्ड राज्य के बागेश्वर जिले मैं स्तिथ हिल स्टेशन और छोटा सा गाँव है पुराने समय मैं कौसानी को वालना के नाम से जाना जाता था जो अपनी हरयाली देव वृक्ष के जंगल और हिमालय के पर्वतों सहित सभी आकर्षित केंद्र है यह जगह प्राक्रतिक पसंद लोगो के लिए बहुत ही अच्छी जगह है यहाँ से हिमालय की चोटियाँ बर्फ से ढकी दिखाई देती है लोग यहाँ पर घुमने आते है यहाँ की प्राक्रतिक सुन्दरता को देख कर गाँधी जी ने इसे भारत का Switzerland कहा था. Kausani मैं सर्दियों मैं आपको बहुत ही ज्यादा बर्फ भी देखने को मिलती है आये जानते है कौसानी की सुंदर जगह के बारे मैं .

    रास्ता

    Kausani उत्तराखण्ड के बगेश्वेर जिले मैं स्तिथ है Kausani बगेश्वेर और अल्मोरा जिले के बॉर्डर पर स्तिथ है.  इसका नज़दीक का रेलवे स्टेशन काठगोदाम है यह नैनीताल से 120 किलोमीटर की दूरी पर है. अल्मोरा से कौसानी लगभग 55 किलोमीटर है आप यहाँ पर बस से भी आ सकते है और आप टैक्सी भी कर सकते है और आप अपने गाड़ी से भी आ सकते है  

    गाँधी आश्रम

    यहाँ पर रुकने के लिए सबसे बढ़िया जगह है गाँधी आश्रम है यहाँ पर रहने के लिए आपको कोई भी चार्ज नहीं देना होता है वहां पर आपकी जो श्रद्धा हो आप वो उस आश्रम को दे सकते है गाँधी आश्रम मैं खाना भी मिलता है और जो बहुत ही साधा खाना होता है यहाँ पर हर राज्य से लोग घुमने आते है यहाँ पर रोज़ शाम को प्राथना होती है जो नज़ारा देखने वाला होता है यहाँ पर लोग एक ही छत के निचे इकठे होते है और इस से आपको एक दुसरे से बात या परिचय करने का मोका मिलता है यहाँ पर हर धर्म के लोग आते है सभी को एक साथ देख कर बहुत ही अच्छा महसूस करते है

    1929 मैं गाँधी जी इस आश्रम मैं रुके थे पहले यह आश्रम कौसानी का चाय का बगान गेस्ट हाउस हुआ करता था जो इसे मालिक थे उन्होंने गाँधी जी को यहाँ पर आने के लिए नियोता दिया था गाँधी जी 14 दिनों तक कौसानी मैं रुके थे गाँधी जी ने अनासक्ति योग पुस्तक कौसानी मैं ही लिखी थी इस लिए इस आश्रम को अनासक्ति योग आश्रम भी कहाँ जाता है.

    बैजनाथ मंदिर

    बैजनाथ मंदिर कौसानी मैं स्तिथ है कौसानी से इस मंदिर की दूरी 20 किलोमीटर है समुन्दर तल से इसकी उचाई 1130 मीटर है यह मंदिर गोमती नदी के किनारे है देहरादून से 303 किलोमीटर है नैनीताल से 131 किलोमीटर है पंतनगर जो की नज़दीक का हवाई अड्डा है वहां से इसकी दूरी 184 किलोमीटर है काठगोदाम जो की यहाँ का नजदीक रेलवे स्टेशन है 150 किलोमीटर है अल्मोरा से 69 किलोमीटर है भागेश्वर से 21 किलोमीटर है ग्वाल्धाम से 23 किलोमीटर है द्वाराहत से 63 किलोमीटर है

    यह मंदिर पुराने समय के बने हुए मंदिर है कहते है कतुरी वंश के राजा ने इस मंदिर का निर्माण 9 लाख लोगो ने मिल कर एक दिन मैं किया था पुराने समय मैं इस मंदिर को कर्तिके पुर नाम से जाना जाता था यहाँ के पत्थरों को देख कर ही अंदाजा लगाया जा सकता है यह बहुत ही पुराने समय के बने हुए मंदिर है यह मंदिर 9वीं से 12वीं शताब्दी का बना हुआ मंदिर है यह नागा शेली मैं बने हुए मंदिर है यहाँ पर बैजनाथ मंदिर मुख्य रूप से शिव का मंदिर है यह मंदिर देखने मैं बहुत ही अच्छा लगता है कहा जाता है की यहीं पर शिव और पार्वती जी ने गोमती नदी और गरुड़ गंगा नदी के संगम पर विवाह किया था यहाँ अन्दर ही  पर शिव, गणेश, पार्वती, चंडिका, कुबेर और सूरी मंदिर है यहाँ पर मुख्य मंदिर शिव का है

    बैजनाथ बेराज झील  

     इस कृतम् झील जो की देखने मैं बहुत ही सुंदर लगती है यह बैजनाथ मंदिर के साथ ही लगती है कृतम् झील का उद्घाटन 14 जनवरी 2016 को हुआ. यहाँ से सुंदर सुंदर पहाड़ भी देखने को मिलते है इस झील मैं आप मछलियों को भी देख सकते है.

    रुध्रधारी जलप्रपात और गुफाये

    रुध्रधारी जो की कौसानी से 12 किलोमीटर दूर एक खास पर्यटक स्थल है जो धान के खेतो देव धर के जंगलों से घिरा हुआ है रुध्रधारी फल्स के बारे मैं कहा जाता है की भगवान शिव और विष्णु से सम्बन्ध है यहाँ पर झरने के निकट एक पहाड़ो के नीचे सोमेश्वर का एक मंदिर है. यहाँ पर देखने लायक छोटी छोटी गुफाय भी है

    सुमित्रानंदन पंत संग्रहालय

    Kausani सुमित्रानंदन पंत संग्रहालय कलात्मग जगह है कौसानी मैं प्रसिद कवी सुमित्रानंदन पंत का जन्म हुआ था उनके नाम पर ही इस संग्रहालय का नाम रखा गया है यहाँ पर उनकी पुस्तकों का संग्रहालय है जो हिंदी और इंग्लिश भाषा मैं है जिनको कांच की अलमारियो मैं रखा गया है हर साल उनकी जयंती के मोके पर संग्रहालय मैं एक काव्यग का आयोजन किया जाता है.

    कसौनी Tea एस्टेट

    Kausani Tea पसंद करने वालों के लिए बहुत ही अच्छी जगह है यहं एस्टेट 8 हेक्टर मैं फैला हुआ है यहाँ पर कोई भी अलग स्वाद की चाय पी सकता है और उसे खरीद भी सकते है नवम्बर से मार्च तक टी एस्टेट बंद रहता है टी एस्टेट यहाँ से ऑस्टेलिया जर्मनी कोरिया सयुक्त राज्य अमेरिका सहित कई देशो मैं चाय पति का निर्यात करता है यहाँ पर किस्म किस्म की चाय पति पाई जाती है यहाँ पर जाने का सब से अच्छा से अप्रैल से जून और अक्टूबर से फरवरी मैं होता है  यहाँ का सुंदर नज़ारा और हरयाली पर्यटक को अपने और आकर्षित करते है कई लोग शादी के बाद यहाँ पर हनीमून मानाने और प्राक्रतिक सुन्दरता को देखने आते है यहाँ आपको हर तरफ हरयाली ही हरयाली देखने को मिलेगी.

    Kausani Switzerland of Uttarakhand

    कोट भ्रमरी मंदिर | गरूर भागेश्वर

    कोट भ्रमरी मंदिर कौसानी से 15 किलोमीटर दूर है बैजनाथ से 3 किलोमीटर दूर है ग्वालदम रोड पर डंगोली छोटे से कसबे के समीप सुंदर सी पहाड़ी पर स्तिथ है डंगोली कोट भ्रमरी मंदिर तक 1 किलोमीटर ट्रेक करके पंहुचा जा सकता है यहाँ पर प्रसाद लेने के लिए कुछ दुकाने भी है इस स्थान पर कभी कतुरी राजाओ का किला था मंदिर से आपको सुंदर घाटीयां देखने को मिलेगी जो बेहद सुंदर है यहाँ से आप छोटे छोटे गाँव को भी देख सकते है जो मंदिर के समीप बसे हुए है.

     दुर्गा सती मैं वर्णहित कथा के अनुसार एक बार कतुर घाटी पानी मैं डूबी थी उस बड़े जलासय के अंदर एक अरुण नाम का देत्य रहा करता था देवताओ की प्राथना पर माँ भगवती ने हर्चिना नाम के पर्वत को तोड़ कर जलासय का जल बहार निकल दिया था पानी समाप्त होने पर वो बहार आया तो देवी ने ब्राह्मणों का रूप धारण किया और देत्य को मार दिया शक्ति रूपा तब से कोट भ्रमरी के नाम से पूजी जाती है कोट भ्रमरी मैं नवराति वर्ष मैं मेला लता है यह मेला गडवाल और कुमाओ को आपस मैं जोड़ता है.

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